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Showing posts from May, 2026

पुराना स्वेटर

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अध्याय 1: संदूक की खामोशी बरसात की वह दोपहर वैसी ही थी जैसी माँ को पसंद थी—धुंधली, नम और सोंधी मिट्टी की खुशबू से भरी। माँ को गुज़रे तीन साल बीत चुके थे, पर घर के उस पिछले कमरे में अब भी उनकी मौजूदगी की एक भारी गंध बसी थी। वह कमरा, जिसे हम सबने 'स्टोर रूम' का नाम दे दिया था, असल में माँ की यादों का कब्रिस्तान था। मैंने भारी मन से वह पुरानी कुंडी खोली। कमरे के भीतर की हवा ठहरी हुई थी। धूल के ज़र्रे रोशनदान से आती सूरज की एक पतली सी किरण में नाच रहे थे। कोने में रखा था वह बड़ा सा लोहे का संदूक। वह संदूक, जिसे माँ हमेशा ताला लगाकर रखती थीं, जैसे उसमें उनके जीवन का कोई बहुत बड़ा राज़ दफ़न हो। ताला खोलने पर जो चरमराहट हुई, वह सन्नाटे में किसी चीख की तरह गूँजी। ऊपर कुछ पुरानी साड़ियाँ थीं—वही सूती साड़ियाँ जिन्हें पहनकर माँ रसोई में घंटों पसीना बहाया करती थीं। उन्हें छूते ही उनकी हथेलियों का खुरदरापन महसूस हुआ। साड़ियों के नीचे, सबसे तह में, मलमल के एक सफेद कपड़े में लिपटा हुआ कुछ भारी सा रखा था। मैंने उसे बाहर निकाला। वह एक स्वेटर था। गहरा नीला, जैसे रात का आकाश होता है। पर वह अधूरा था। उसकी ...

आधा कप चाय

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अध्याय 1: दो प्याले, एक सन्नाटा जगन बाबू के घर में घड़ी की 'टिक-टिक' भी किसी हथौड़े की तरह सुनाई देती थी। रिटायरमेंट के पाँच साल बाद, उनके जीवन का भूगोल महज़ तीन कमरों और एक बालकनी में सिमट गया था। सुबह छह बजे जब अलार्म बजता, तो वह सिर्फ़ समय बताने के लिए नहीं, बल्कि यह याद दिलाने के लिए होता कि एक और लंबा दिन काटने की चुनौती सामने खड़ी है। रसोई में जाकर स्टोव जलाना उनकी दिनचर्या का सबसे पहला और सबसे पवित्र हिस्सा था। वह पुराने पीतल के बर्तन में पानी चढ़ाते, अदरक कूटते और फिर बड़ी सावधानी से चाय की पत्ती डालते। जब चाय खौलने लगती और उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती, तब कुछ पलों के लिए उन्हें लगता कि सब कुछ पहले जैसा ही है। वह सिर्फ़ अपने लिए चाय नहीं बनाते थे। वह हमेशा दो कप चाय बनाते थे। पुराने चीनी मिट्टी के दो कप, जिन पर नीले फूलों के बेल-बूटे बने थे। एक कप अपने लिए और दूसरा कप मेज़ की उस तरफ, जहाँ कभी मालती बैठा करती थी। "आज अदरक थोड़ी ज़्यादा कूट दी है, तुम्हें तीखी चाय पसंद थी न?" जगन बाबू खाली कुर्सी की ओर देखकर बुदबुदाए। वहाँ से कोई जवाब नहीं आया। सिर्फ़ पंखे की घरघराहट और ...